القصيدة المُضَرِيَّة

في الصلاة على خير البرية — الإمام شرف الدين البوصيري (ت 696هـ)

قصيدة في الصلاة والسلام على النبي ﷺ، مطلعها «يا رَبِّ صَلِّ عَلَى المُخْتَارِ مِنْ مُضَرٍ»، جمع فيها البوصيري ألوانًا من التعداد البديع في الصلاة على النبي ﷺ بعدد الحصى والثرى وقطر الماء وورق الأشجار، وختمها بالدعاء والترضي عن الخلفاء الراشدين. وقد تلقّتها الأمة بالقبول وحُفظت في مجالس الذكر شرقًا وغربًا.

अल-क़सीदा अल-मुदरिया — इमाम शरफ़ुद्दीन अल-बूसीरी

यह पैगंबर ﷺ पर आशीर्वाद भेजने की एक कविता है, जिसकी शुरुआत 'ऐ मेरे रब, मुदर के चुने हुए पर अपनी रहमतें भेज' से होती है। इसमें अल-बूसीरी ने पैगंबर ﷺ पर आशीर्वादों की शानदार गणना की है - कंकड़, मिट्टी, बारिश की बूंदों और पेड़ों के पत्तों जितनी असंख्य रहमतें - और इसका समापन सही मार्गदर्शित ख़लीफ़ाओं के लिए दुआ और प्रशंसा के साथ होता है। इसे मुस्लिम दुनिया भर में ज़िक्र की सभाओं में प्रेमपूर्वक पढ़ा जाता है।

يا رَبِّ صَلِّ عَلَى المُخْتَارِ مِنْ مُضَرٍ
وَالأَنْبِيا وَجَميعِ الرُّسْلِ مَا ذُكِرُوا

हे मेरे रब, मुदर के चुने हुए (पैगंबर) पर, और सभी नबियों तथा रसूलों पर, जब भी उनका ज़िक्र हो, अपनी रहमतें नाज़िल फरमा।

وَصَلِّ رَبِّ عَلَى الهَادِي وَشِيْمَتِهِ
وَصَحْبِهِ مِنْ لِطَيِّ الدِّينِ قدْ نَشَرُوا

और ऐ रब, उस रहनुमा (मार्गदर्शक) और उनके नेक स्वभाव पर, और उनके उन साथियों पर भी रहमतें नाज़िल फरमा जिन्होंने पाक दीन को लगन से फैलाया।

وَجاهَدُوا مَعَهُ في اللهِ وَاجْتَهَدُوا
وهاجَرُوا ولَهُ آوَوْا وَقَدْ نَصَرُوا

उन्होंने अल्लाह की राह में उनके साथ जिहाद किया और कड़ी मेहनत की, हिजरत की, उन्हें पनाह दी और उनकी सच्ची मदद की।

وبَيَّنُوا الْفَرْضَ وَالمَسْنُونَ وَاعْتَصَبُوا
للهِ وَاعْتَصِمُوا باللهِ وَانْتَصَرُوا

उन्होंने फर्ज़ और सुन्नत को स्पष्ट किया, अल्लाह के लिए एकजुट हुए, अल्लाह को मज़बूती से थामे रखा और विजय प्राप्त की।

أزْكَى صَلاَةٍ وأتماها وَأَشْرَفَها
يُعِطِّرُ الكَوْنُ رَيَّا نَشْرها العَطِرُ

उन पर सबसे पाक, सबसे मुकम्मल और सबसे अफ़ज़ल रहमतें हों, जिनकी खुशबूदार महक से सारा ब्रह्मांड सुगंधित हो उठता है।

مَفْتُوقَةً بِعَبِيرِ الْمِسْكِ زَاكِيةً
مِنْ طِيبها أَرَجُ الرَّضْوَانِ يَنْتَشِرُ

जो कस्तूरी की पाक खुशबू से भरी हुई हों, जिनकी पाकीज़गी से अल्लाह की रज़ा की महक दूर-दूर तक फैल जाए।

عَدَّ الْحَصَى وَالثَّرَى والرَّمْلِ يَتْبَعُهَا
نَجْمُ السَّماءِ وَنَبْتُ الأَرْضِ والمَدَرُ

इतनी रहमतें जितनी कंकड़, मिट्टी और रेत के कण हैं, और उसके बाद आसमान के तारे, ज़मीन के पौधे और मिट्टी के ढेले हैं।

وَعَدَّ ما حَوَتِ الأُشْجَارُ منْ وَرَقٍ
وكُلِّ حَرْفٍ غَدَا يُتْلَى وَيُستَطَرُ

और जितनी पेड़ों पर पत्तियाँ हैं, और हर वह अक्षर जो पढ़ा और लिखा जाता है, उतनी रहमतें हों।

وَعَدَّ وَزْنَ مَثاقِيلِ الْجِبالِ كَذَا
يلِيهِ قَطْرُ جَمِيعِ الماءِ والمَطَرُ

और पहाड़ों के वज़न के बराबर, उसके बाद सभी पानी और बारिश की बूँदों के बराबर रहमतें हों।

وَالطَّيْرِ وَالوَحْشِ وَالأسْماكِ مَعْ نَعَمٍ
يَتْلُوهُمُ الجِنُّ وَالأمْلاكُ وَالبَشَرُ

और पक्षियों, जंगली जानवरों, मछलियों और चौपायों की संख्या के बराबर, उसके बाद जिन्न, फरिश्ते और इंसानों की संख्या के बराबर रहमतें हों।

والذَّرُّ والنَّمْلُ معَ جَمْعِ الحُبُوبِ كَذَا
والشَّعْرُ والصُّوفُ والأَرْياشُ والوَبَرُ

और परमाणुओं और चींटियों की संख्या के बराबर, साथ ही सभी अनाजों, और बालों, ऊन, पंखों और ऊँट के बालों की संख्या के बराबर रहमतें हों।

وما أحاطَ بهِ العِلْمُ المُحِيطُ وَما
جَرَى بهِ القَلَمُ المَأمُونُ وَالقَدَرُ

और उस सब के बराबर जिसे व्यापक ज्ञान ने घेरा है, और वह सब जो भरोसेमंद क़लम ने लिखा है, और तक़दीर ने तय किया है, उतनी रहमतें हों।

وعَدَّ نَعْمَائِكَ اللاتِي مَنَنْتَ بِهَا
عَلَى الخلائِقِ مُذْ كانُوا وَمُذْ حُشِرُوا

और आपकी उन नेमतों की संख्या के बराबर जो आपने अपनी सारी मखलूक पर उनके वजूद में आने से लेकर उनके दोबारा उठाए जाने तक अता की हैं।

وعَدَّ مِقْدَارِهِ السَّامِي الَّذي شَرُفَتْ
بهِ النَّبِيُّونَ والأمْلاكُ وافْتَخَرُوا

और उनकी उस बुलंद मर्तबे के बराबर, जिससे नबियों और फरिश्तों को इज़्ज़त मिली और उन्होंने फख्र महसूस किया।

وعَدَّ ما كانَ في الأكْوانِ يا سَنَدِي
وما يَكُونُ إلَى أنْ تُبْعَثَ الصُّوَرُ

और ऐ मेरे सहारा, उन सभी चीज़ों की संख्या के बराबर जो कायनात में मौजूद थीं, और जो मौजूद होंगी जब तक कि सभी रूपों को दोबारा ज़िंदा न किया जाए।

في كُلِّ طَرْفَةِ عَيْنٍ يَطْرِفُونَ بِها
أهْلُ السَّموَاتِ والأَرْضِينَ أوْ يَذَرُ

हर उस पलक झपकने के बराबर जिससे आसमानों और ज़मीनों के बाशिंदे देखते हैं या अपनी नज़र हटाते हैं।

مِلْءُ السَّموَاتِ والأَرْضِينَ مَعْ جَبَلٍ
والْفَرْشِ والعَرْشِ والكُرْسِي وَما حَصَرُوا

आसमानों और ज़मीनों को भरने वाली, पहाड़ों के साथ, ज़मीन के फैलाव, अर्श, कुर्सी और उन सभी चीज़ों को जो वे घेरे हुए हैं।

ما أَعْدَمَ اللهُ مَوْجُوداً وَأَوْجَدَ
مَعْدُوماً صَلاَة دَوَاماً لَيْسَ تَنْحَصِرُ

जब तक अल्लाह ने किसी मौजूद चीज़ को खत्म नहीं किया है और किसी गैर-मौजूद चीज़ को वजूद बख्शा है, ये रहमतें हमेशा जारी रहें और बेहिसाब हों।

تَسْتَغْرِقُ العدَّ مَعْ جَمعِ الدُّهورِ كَمَا
يُحِيطُ بالحَدِّ لا تُبْقِي ولا تَذَرُ

ये रहमतें सभी युगों की गिनती को समाहित कर लें, जैसे वे सभी सीमाओं को घेर लेती हैं, कुछ भी बाकी नहीं छोड़तीं।

لا غايَةً وَانتِهَاءً يَا عَظِيمُ لَها
ولا لَهُم أمَدٌ يُقْضَى وَيُنْتَظَرُ

ऐ अज़ीम (महान), इन रहमतों की कोई हद या अंत नहीं है, न ही उनके लिए कोई ऐसी मुद्दत है जिसे पूरा किया जा सके या जिसका इंतज़ार किया जाए।

مَعَ السَّلامِ كَمَا قَدْ مَرَّ مِنْ عَدَدٍ
رَبَا وضاعَفَها والفَضْلُ مُنْتَشِرُ

उन पर सलाम हो, जितनी गिनती पहले गुज़र चुकी है उससे भी ज़्यादा गुना और बढ़ी हुई, क्योंकि उसका फ़ज़ल (कृपा) हर जगह फैला हुआ है।

وَعَدَّ أَضْعَافِ مَا قَدْ مَرَّ مِنْ عَدَدٍ
مَعْ ضِعْفِ أَضْعافِهِ يَا مَنْ لَهُ الْقَدَرُ

और जितनी गिनती पहले गुज़र चुकी है, उसके कई गुना ज़्यादा, और फिर उसके भी दोगुने गुना ज़्यादा सलाम हो, ऐ वह जिसकी कुदरत (शक्ति) और तक़दीर (भाग्य) है।

كَمَا تُحِبُّ وَتَرْضَى سَيِّدِي وكَمَا
أمَرْتَنا أنْ نُصَلِّي أنْتَ مُقْتَدِرُ

यह सब वैसे ही अता फरमा जैसा तू पसंद करता है और जिससे तू राज़ी होता है, मेरे आका, और जैसा तूने हमें दरूद भेजने का हुक्म दिया है, बेशक तू ही सब पर कुदरत रखने वाला है।

وَكُلُّ ذلِكَ مَضْرُوبٌ بِحَقِّكَ في
أنْفاسِ خَلْقِكَ إنْ قَلُّوا وَإنْ كَثُرُوا

और यह सब, तेरे हक़ के वास्ते, तेरी मखलूक की साँसों की संख्या से गुणा हो जाए, चाहे वे कम हों या ज़्यादा।

يَارَبِّ واغْفِرْ لِتَالِيها وسامِعِها
وَالمُرْسَلِينَ جَمِيعاً أَيْنَمَا حَضَرُوا

ऐ रब, इस नज़्म को पढ़ने वाले और इसे सुनने वाले को बख्श दे, और सभी रसूलों को भी, जहाँ कहीं भी वे मौजूद हों।

وَوَالِدينَا وأَهْلِينا وَجِيرَانِنَا
وَكُلُّنا سَيِّدِي لِلْعَفْوِ مُفْتَقِرُ

और हमारे वालिदैन (माता-पिता), हमारे घरवालों और हमारे पड़ोसियों को भी बख्श दे, क्योंकि हम सभी, मेरे आका, तेरी माफ़ी के सख्त मोहताज हैं।

وقَدْ أَتَتْ بِذُنُوبٍ لاَ عِدَادَ لَها
لكِنْ عَفْوَكَ لا يُبْقى ولا يَذَرُ

हालांकि हम बेशुमार गुनाहों के साथ आए हैं, लेकिन तेरी बेपनाह माफ़ी कुछ भी बाकी नहीं छोड़ती और कोई गलती नहीं बख्शती।

والهَمُّ عَنْ كُلِّ ما أَبْغِيهِ أَشْمَلَنِي
وقَدْ أَتَى خاضِعاً وَالقَلْبُ مُنْكَسِرٌ

जो कुछ भी मैं चाहता हूँ, उसकी चिंता ने मुझे घेर लिया है, और मैं तेरे सामने विनम्रता से और टूटे हुए दिल के साथ हाज़िर हुआ हूँ।

أَرْجُوكَ يَا رَبِّ في الدَّارَيْنِ تَرْحَمُنا
بِجَاهِ مَنْ فِي يَدَيْهِ سَبَّحَ الحَجَرُ

मैं तुझसे इल्तिजा करता हूँ, ऐ रब, कि तू हम पर दोनों जहानों में रहम फरमा, उस हस्ती के वसीले से जिनकी मुट्ठी में पत्थर ने तस्बीह पढ़ी थी।

يَا رَبِّ أَعْظِمْ لَنا أجْراً وَمَغْفِرَةً
لأَنَّ جُودَكَ بَحْرٌ لَيْسَ يَنْحَصِرُ

ऐ रब, हमें अज़ीम अजर (इनाम) और मग्फिरत (माफ़ी) अता फरमा, क्योंकि तेरी सखावत (उदारता) एक ऐसा बेपनाह समंदर है जिसकी कोई हद नहीं।

وكُنْ لَطِيفاً بِنَا في كلِّ نَازِلَةٍ
لُطْفاً جَمِيلاً بهِ الأهْوَالُ تَنْحَسِرُ

और हर मुसीबत में हम पर मेहरबान रह, ऐसी खूबसूरत मेहरबानी से जिससे सभी खौफ और परेशानियाँ दूर हो जाएँ।

بالمُصْطَفَى المُجْتَبَى خَيْرِ الأنامِ ومَنْ
جَلاَلَةً نَزَلَتْ في مَدْحِهِ السُّوَرُ

यह सब मुस्तफ़ा, चुने हुए, तमाम इंसानों में बेहतरीन, और जिनकी अज़मत (महानता) की तारीफ में कुरान की पूरी सूरहें नाज़िल हुईं, उनके सदके में अता फरमा।

ثُمَّ الصَّلاَةُ عَلَى المُخَتارِ ما طَلَعَتْ
شَمْسُ النَّهارِ وما قَدْ شَعْشَعَ الْقَمَرُ

फिर चुने हुए (पैगंबर) पर रहमतें हों जब तक दिन का सूरज निकलता रहे और चाँद चमकता रहे।

ثُمَّ الرِّضَا عَنْ أبي بَكْرٍ خَلِيفَتِهِ
مَنْ قَامَ مِنْ بَعْدِهِ لِلدِّينِ يَنْتَصِرُ

फिर अबू बक्र पर अल्लाह की रज़ा हो, उनके खलीफा पर, जो उनके बाद दीन को कायम रखने और उसकी मदद करने के लिए खड़े हुए।

وَعَنْ أَبِي حَفْصٍ الفَارُوقِ صاحِبِهِ
مَنْ قَوْلُهُ الْفَصْلُ في أحْكامِهِ عُمَرُ

और अबू हफ्स अल-फारूक पर अल्लाह की रज़ा हो, उनके साथी उमर पर, जिनके फैसले में उनका कलाम निर्णायक था।

وَجُدْ لِعُثْمَانَ ذِي النورَيْنِ مَنْ كَمُلَتْ
لَهُ المَحَاسِنُ في الدَّارَيْنِ والظَّفَرُ

और उस्मान ज़ुन-नूरैन पर अपनी सखावत फरमा, जिनके लिए दोनों जहानों में खूबियाँ मुकम्मल थीं, और जिन्होंने कामयाबी हासिल की।

كَذَا عَلِيٌّ مَعَ ابْنَيْهِ، وَأُمِّهِمَا
أَهْلِ العَبَاءِ، كَمَا قَدْ جَاءَنَا الخَبَرُ

इसी तरह अली, उनके दोनों बेटों और उनकी माँ के साथ — जो अहले-अबा (चादर वाले) हैं — जैसा कि हमें खबर मिली है।

كَذَا خَدِيجَةُ الكُبْرَى الَّتِي بَذَلَتْ
أَمْوَالَهَا لِرَسُولِ اللهِ يَنْتَصِرُ

इसी तरह खदीजा अल-कुबरा, जिन्होंने अपना माल खर्च किया ताकि अल्लाह के रसूल को मदद मिले और वह गालिब हों।

وَالطَّاهِرَاتُ نِسَاءُ المُصْطَفَى، وَكَذَا
بَنَاتُهُ، وَبَنُوهُ، كُلَّمَا ذُكِرُوا

और चुने हुए नबी की पाक बीवियाँ; इसी तरह उनकी बेटियाँ और उनके बेटे, जब भी उनका ज़िक्र हो।

سَعدٌ سَعِيدُ بنُ عَوْفٍ طَلْحَةٌ وَأَبُو
عُبَيْدَةَ وَزُبَيْرٌ سادَةٌ غُرَرٌ

और साद, सईद इब्न औफ, तलहा, अबू उबैदा और ज़ुबैर पर भी, ये सभी नेक और मुमताज़ सरदार हैं।

وَالآلِ وَالصَّحْبِ والاتْبَاعِ فاطِمَةٌ
ما حَنَّ لَيْلُ الدَّيَاجِي أَوْ بَدَا السَّحَرُ

और उनके परिवार पर, साथियों पर और अनुयायियों पर, फातिमा सहित, जब तक काली रात सुबह के लिए तरसती रहे या सहरी का नूर ज़ाहिर हो।