يَا إِمَامَ الرُّسُلِ يَا سَنَدِي

يَا رَسُولَ اللهِ خُذْ بِيَدِي — الشيخ عبد الرحيم البُرَعي اليماني (ت 803هـ)

من أشهر قصائد الشيخ عبد الرحيم البُرَعي اليماني، تُنشد بلازمتها المشهورة «يا إمام الرسل يا سندي… يا رسول الله خذ بيدي» في مجالس المديح في أرجاء العالم الإسلامي، وتفيض توسلًا واستغاثة بجاه النبي ﷺ وثناءً على شمائله.

या इमाम अर-रुसुलि या सनदी — शेख़ अब्दुल रहीम अल-बुरई अल-यमनी

यह यमन के शेख अब्दुल रहीम अल-बुरई की सबसे प्रसिद्ध कविताओं में से एक है, जिसे मुस्लिम दुनिया भर में प्रशंसा की सभाओं में इसकी प्रिय धुन 'ऐ रसूलों के इमाम, ऐ मेरे सहारा... ऐ अल्लाह के रसूल, मेरा हाथ थाम लो' के साथ गाया जाता है। यह पैगंबर ﷺ के पद के माध्यम से हार्दिक प्रार्थना और उनके नेक गुणों की प्रशंसा से ओत-प्रोत है।

يَا إِمَامَ الرُّسُلِ يَا سَنَدِي
أَنْتَ بَابُ اللهِ مُعْتَمَدِي

हे पैगंबरों के इमाम, मेरे सहारे, आप ही अल्लाह का द्वार और मेरी अंतिम निर्भरता हैं।

فَبِدُنْيَايَ وَآخِرَتِي
يَا رَسُولَ اللهِ خُذْ بِيَدِي

अतः, मेरे इस लोक और परलोक दोनों में, हे अल्लाह के रसूल, मेरा हाथ थाम लीजिए।

قَسَمًا بِالنَّجْمِ حِينَ هَوَى
مَا الْمُعَافَى وَالسَّقِيمُ سَوَا

उस तारे की कसम जब वह नीचे उतरा, मैं कसम खाता हूँ कि स्वस्थ और बीमार बराबर नहीं होते।

فَاخْلَعِ الْكَوْنَيْنِ عَنْكَ سِوَى
حُبِّ مَوْلَى الْعُرْبِ وَالْعَجَمِ

अतः, दोनों लोकों से स्वयं को मुक्त कर लो, सिवाय अरबों और गैर-अरबों के मालिक के प्रेम के।

يَا إِمَامَ الرُّسُلِ يَا سَنَدِي
أَنْتَ بَابُ اللهِ مُعْتَمَدِي

हे पैगंबरों के इमाम, मेरे सहारे, आप ही अल्लाह का द्वार और मेरी अंतिम निर्भरता हैं।

فَبِدُنْيَايَ وَآخِرَتِي
يَا رَسُولَ اللهِ خُذْ بِيَدِي

अतः, मेरे इस लोक और परलोक दोनों में, हे अल्लाह के रसूल, मेरा हाथ थाम लीजिए।

سَيِّدُ السَّادَاتِ مِنْ مُضَرٍ
غَوْثُ أَهْلِ الْبَدْوِ وَالْحَضَرِ

आप मुदर जनजाति के सरदारों के सरदार हैं, रेगिस्तान के निवासियों और शहरी लोगों दोनों के लिए सहायता हैं।

صَاحِبُ الْآيَاتِ وَالسُّوَرِ
مَنْبَعُ الْأَحْكَامِ وَالْحِكَمِ

आप दिव्य चिह्नों और अध्यायों से सुशोभित हैं, पवित्र कानूनों और गहन ज्ञान के मूल स्रोत हैं।

يَا إِمَامَ الرُّسُلِ يَا سَنَدِي
أَنْتَ بَابُ اللهِ مُعْتَمَدِي

हे पैगंबरों के इमाम, मेरे सहारे, आप ही अल्लाह का द्वार और मेरी अंतिम निर्भरता हैं।

فَبِدُنْيَايَ وَآخِرَتِي
يَا رَسُولَ اللهِ خُذْ بِيَدِي

अतः, मेरे इस लोक और परलोक दोनों में, हे अल्लाह के रसूल, मेरा हाथ थाम लीजिए।

قَمَرٌ طَابَتْ سَرِيرَتُهُ
وَسَجَايَاهُ وَسِيرَتُهُ

आप एक चाँद की तरह हैं, जिनका आंतरिक स्वरूप शुद्ध है, और जिनका चरित्र तथा आचरण अत्यंत उत्कृष्ट है।

صَفْوَةُ الْبَارِي وَخِيرَتُهُ
عَدْلُ أَهْلِ الْحِلِّ وَالْحَرَمِ

आप सृष्टिकर्ता के चुने हुए और सर्वोत्तम चयन हैं, सभी लोगों के लिए न्याय के प्रतीक हैं, चाहे वे पवित्र भूमि में हों या सामान्य भूमि में।

يَا إِمَامَ الرُّسُلِ يَا سَنَدِي
أَنْتَ بَابُ اللهِ مُعْتَمَدِي

हे पैगंबरों के इमाम, मेरे सहारे, आप ही अल्लाह का द्वार और मेरी अंतिम निर्भरता हैं।

فَبِدُنْيَايَ وَآخِرَتِي
يَا رَسُولَ اللهِ خُذْ بِيَدِي

अतः, मेरे इस लोक और परलोक दोनों में, हे अल्लाह के रसूल, मेरा हाथ थाम लीजिए।

مَا رَأَتْ عَيْنٌ وَلَيْسَ تَرَى
مِثْلَ طَهَ فِي الْوَرَى بَشَرَا

किसी आँख ने कभी नहीं देखा, और न कभी देखेगी, ताहा ﷺ जैसा कोई इंसान सृष्टि में।

خَيْرُ مَنْ فَوْقَ الثَّرَى أَثَرَا
طَاهِرُ الْأَخْلَاقِ وَالشِّيَمِ

आप उन सभी में सर्वश्रेष्ठ हैं जिन्होंने धरती पर अपनी छाप छोड़ी है, अपने नैतिकता और स्वभाव में पवित्र हैं।