फ़रिश्तों पर विश्वास

मुसलमान फ़रिश्तों को ख़ुदा की सृष्टि का एक मखलूक मानता है; उन्हें पूरी तरह इबादत और लगातार तसब्बीह के लिए चुना गया है. वे रौशनी के मखलूक हैं और अपनी असली शक्ल में इंसानों को नज़र नहीं आते, लेकिन ख़ुदा ने ज़रूरत के वक़्त उन्हें भौतिक रूप धारण करने की ताक़त दी, जैसा कि उन्होंने नबियों से मिलने पर किया था. उनके कामों में ख़ुदा के हुक्मों को अंजाम देना, वही पहुँचाना, क़ायनात के अमūr का इंतज़ाम करना, इबादत करने वालों के अ'माल दर्ज करना, और मोमिनों की हिफाज़त व उनको मजबूत करना शामिल है.

जहाँ तक जिन्नात का सवाल है, वे एक और मखलूक हैं जिन्हें ख़ुदा ने आग से पैदा किया। वे भी इंसानों की तरह ज़िम्मेदार और हिसाब के काबिल हैं; उनमें ईमान वाले नेक और बाग़ी पापी दोनों पाए जाते हैं. हम उन्हें उनकी असली सूरत में नहीं देखते, मगर वे हमें देख सकते हैं, और यही उनके मौजूदगी के एहसास में फर्क आने की वज़ह है. वे ग़ैब के बारे में ज्ञान नहीं रखते; उनकी ज़िंदगियाँ भी ख़ुदा के क़वानेन के अधीन हैं, और वे बिना ख़ुदा की इज़ाज़त के न नुकसान कर सकते हैं और न ही फ़ायदा पहुँचा सकते हैं.

शैतान जिन्नों के बे-ईमान हक़ के लोग हैं, जिनकी क़ियादत इब्लीस करता है और जो इंसानों के ख़िलाफ़ दुश्मनी व बहकाने के रास्ते अपनाते हैं. उनकी ताक़त ज़्यादातर बस फुसफ़ुसाह (वसवस) करने और बुराई को आकर्षक दिखाने तक सीमित है; उनके पास लोगों पर जबरन हुक़ूमत करने का कोई सत्तारूढ़ इल्म नहीं है. इसलिए जो मोमिन ख़ुदा की याद का अभ्यास करता है और उसके हुक्म पर कायम रहता है, वह उनकी चालों से महफ़ूज़ रहता है, जबकि जो अपनी हवाओं का पीछा करता है और अपने रब से غافल रहता है, वह उनकी जालों में फँस जाता है.

फ़रिश्तों और जिन्नों पर ईमान और इस ग़ैब दुनिया के मौजूद होने का यक़ीन मोमिन के दिल में ख़ुदा की तज़्ज़ीम (परतिष्ठा) को बढ़ाता है. जब इंसान जानता है कि फरिश्ते उसकी हर कार्रवाई को नज़र में रखते हैं और उसके अल्फाज़ लिखते हैं, तो यह उसे अपने रब के सामने अपने रहस्य और ज़ाहिर दोनों में सतर्क रहने, और शैतान की फुसफ़ुसाह से बचने के लिए इलाही शरण माँगने की तरफ़ प्रेरित करता है; इससे उसके आख़लाक़ में मजबूती आती है और वह इबादत व हिदायत की ओर बढ़ता तथा गुनाहों से बचता है, ख़ुदा की इनाम और रहमत की उम्मी̀द में.

يؤمن المسلم بالملائكة كخلق من خلق الله، اصطفاهم للطاعة المطلقة والتسبيح الدائم. هم كائنات نورانية غير مرئية للبشر في هيئتها الأصلية، لكن الله منحهم القدرة على التشكل بأشكال مادية عند الحاجة، كما حدث في زيارتهم للأنبياء. وظيفتهم تتنوع بين تنفيذ أوامر الله، وحمل الوحي، وتدبير شؤون الكون، وتسجيل أعمال العباد، وحماية المؤمنين وتثبيتهم.

أما الجن، فهم خلق آخر أوجده الله من نار، وهم مكلفون ومحاسبون تماماً كالبشر، ينقسمون إلى مؤمنين صالحين وعصاة متمردين. نحن لا نراهم في صورتهم الأصلية، لكنهم يروننا، مما يفسر التفاوت في إدراك وجودهم. وهم لا يعلمون الغيب، وحياتهم تخضع لسنن الله في الكون، ولا يملكون ضراً ولا نفعاً إلا بإذنه تعالى.

الشياطين هم كفار الجن، يقودهم إبليس في معاداة البشر وسلوك طريق الإغواء. إن قدرتهم تقتصر على الوسوسة وتزيين الشر، ولا يملكون سلطاناً قسرياً على العباد. فالمؤمن الذي يتمسك بذكر الله ويستقيم على أمره، يكون في حصن من مكائدهم، بينما يسقط في حبائلهم من يتبع هواه ويغفل عن ربه.

تثمر عقيدة الإيمان بالملائكة والجن واليقين بوجود هذا العالم الغيبي تعظيماً لله في قلب المؤمن. حين يعلم الإنسان أن هناك ملائكة ترقب أفعاله وتكتب أقواله، يدفعه ذلك إلى مراقبة الله في سره وعلنه، والاستعاذة من وساوس الشيطان، مما يقوي الجانب الأخلاقي ويدفع نحو الطاعة وتجنب المعاصي رجاءً في ثواب الله ورحمته.