ग़ैब पर ईमान
दुनिया सिर्फ़ उन्हीं चीज़ों तक सीमित नहीं है जिन्हें हमारी सीमित इंद्रियाँ पकड़ सकती हैं; हक़ीक़त उस मादّी दुनिया से कहीं अधिक वसीع है जो हम देख और छू सकते हैं. रूह, जो हमारी ज़िन्दगी का सार है, एक मौजूदा हक़ीक़त है जिस पर हम ईमान लाते हैं हालाँकि उसकी ماهियत हमारी इंद्रियों से सीधे पहचान में नहीं आती. इस तरह, ग़ैब पर ईमान मुमिन की एक खास पहचान है: वह उन चीज़ों पर भी सच्चाई मान लेता है जो पदार्थ के परे हैं क्योंकि अल्लाह की सची ख़बरों पर उसे भरोसा है — और यह यक़ीन की सबसे ऊँची श्रेणी है.
अल्लाह की हिकमत और रहमत यह है कि उसने हमें उन बातों की ख़बर दीं जिनको हमारी अक़्ल अकेले नहीं पकड़ सकती, और यह ख़बरें उसकी तरफ़ से भेजी गईं संदेशों के ज़रिए आईं जो हमारी खुद की सीमाओं से बाहर थीं. इन इलाही ख़बरों के पहुँचने के स्थिर रास्ते तय हुए — उनसे बड़ी राह पैग़म्बरों को भेजी गई फ़रिश्तों के ज़रिये हुई ताकि वह शरीअत पहुचाएँ; यह सब हमारे लिए एक रोशनी है जो हमें सिरे से मادیपन की तंगदिली से निकाल कर अल्लाह की जानकारी और आख़िरत के काम की विस्तृत समझ की तरफ़ ले जाती है.
अच्छी नैतिकता तभी कायम रहती है जब वह इमान की नींव पर टिकी हो; जो मुमिन जानता है कि अल्लाह उसे उसकी जाँन-ओ-नागर में देखता है, वही वह है जो छुपकर भी भलाई करता और गुनाह से बचता है, चाहे उसे तारीफ़ मिले या न मिले. जो अपने अमलों को सिर्फ़ مادی कारणों से जोड़कर देखते हैं, वे अपनी निजी फ़ायदों के गुलाम बने रहते हैं और आध्यात्मिक उन्नति व इंसानी ऊँचे मापदंडों से दूर रह जाते हैं.
आख़िर में, ग़ैब पर ईमान क़वाओं (क़ानूनों) से टकराता नहीं; अल्लाह ही कारणों और कारणों के निर्माता हैं. जो लोग विज्ञान और कुछ ग़ैबियों में टकराव देखते हैं, उनका यह समझ कई बार नाकाफ़ी फ़ह्म की वजह से है. मिसाल के तौर पर मौसम की रिपोर्ट भविष्यवाणी का ग़ैब का पता नहीं होती, बल्कि यह अल्लाह की बनायी हुई क़वाओं में पैटर्न का इस्तख़रा (इंस्ट्रो) है — बिल्कुल वैसे ही जैसे कोई रोकता हुआ डाकिया आ रहा देख कर कोई पहले से बता दे कि डाक आएगी.
إن العالم لا يقتصر على ما تدركه حواسنا المحدودة، فالحقيقة أوسع من عالم الشهادة المادي. فالروح، التي هي سر حياتنا، حقيقة قائمة نؤمن بها رغم غياب ماهيتها عن إدراكنا الحسي. وهكذا، يُعد الإيمان بالغيب تمييزاً للمؤمن، حيث يصدق بما وراء المادة اعتماداً على خبر الله الصادق، وهو أسمى مراتب اليقين.
من حكمة الله ورحمته بنا أن أخبرنا عما تعجز عقولنا عن إدراكه وحده، وذلك عبر رسالاته التي جاءت من خارج ذواتنا. وقد اتخذت هذه الأخبار الإلهية طرقاً ثابتة، أعظمها إرسال الملائكة إلى الرسل المصطفين لتبليغ الشريعة؛ ليكون ذلك بياناً لنا يخرجنا من ضيق المادة إلى رحابة المعرفة بالله والعمل لليوم الآخر.
إن الأخلاق الفاضلة لا تستقيم إلا إذا بُنيت على أساس العقيدة الإيمانية، فالمؤمن الذي يوقن بأن الله يراه في سره وعلانيته هو وحده الذي يلتزم الخير ويجتنب الشر، سواء وجد ثناءً أو لم يجد. أما من يربط أفعاله بالأسباب المادية وحدها، فإنه يظل أسيراً لمصالحه الشخصية، معرضاً عن الرقي الروحي والقيم الإنسانية السامية.
ختاماً، إن الإيمان بالغيب لا يتناقض مع السنن الكونية، فالله هو خالق الأسباب والمسببات. وما يظنه البعض تعارضاً بين العلم وبعض الغيبيات، هو في الحقيقة قصور في الفهم. فالنشرة الجوية مثلاً ليست إدراكاً للغيب، بل استقراءً لسنن الله في الظواهر المادية المشهودة، تماماً كمن يرى قدوم البريد ويخبر به قبل وصوله.