रसूलों पर ईमान

लोगों को रसूलों की ज़रूरत इसलिए होती है कि वे उन्हीं की तरह इंसान होते हैं जिन्हेँ भेजा गया; वे पैदा होते हैं, मरते हैं, खाते हैं और बाज़ारों में चलते-फिरते हैं. पुरानी उम्मतें इंसानों के भेजे जाने पर हैरान सी हुआ करती थीं, मगर अल्लाह ने बताया कि रसूल की क़ौमी हुक़ूमत इसलिए ज़रूरी है ताकि लोग उसकी नकल कर सकें और उस पर अमल कर सकें. रसूलों में कोई अल्लाही ओصاف नहीं है; वे इज़्ज़तदार इबादतगार हैं जिन्हें अल्लाह ने वही के ज़रिये चुनकर भेजा है.

रसूलों की ‘इस्मत’ उस मामले में कायम रहती है जब बात शरिया के पारयाने की होती है; जब वे अल्लाह का पैग़ाम पहुँचाते हैं तो वे अपनी हवाओं के अनुसार नहीं बोलते. दुनियाوی मामलात और ऐसे व्यक्तिगत इज्तिहादों में जहाँ वही नाज़िल न हुई हो, गलती हो सकती है, मगर अल्लाह उन्हें उस पर कायम नहीं रखता बल्कि उन्हें सही रस्ता दिखा देता है — जैसे अंधे की कहानी और बदर के असिरों के मामले में हुआ — ताकि आकाशी वही ही सच्चा पैमाना साबित हो.

मुहम्मद ﷺ आख़िरी नबी हैं और उनकी रसालत सभी इंसानों के लिए आम है, हर ज़माने और हर जगह के लिए मुफीद है. शरीअत ने बड़ी लचीलापन दिखाई है: अक़ीदा और इबादात के मामलों में ठोस और अपरिवर्तनीय नुस्ख़े दिए गए हैं, जबकि लेन-देन, प्रशासन और सियासी मामलों में मुसलमानों को साझा भलाई के लिए इज्तिहाद करने की गुंजाइश दी गई है, बशर्ते वे इस्लाम के आम सिद्धांतों का पालन करें.

मुहम्मद ﷺ की शख्सियत अपने आप में एक नायाब मिज़ाज़ (मौज़ू) है; उनकी सच्चाई, ईमानदारी, साथियों में नम्रता और ज़ाहिदाना ज़िन्दगी ये सब उनकी महानता के पैमाने हैं. वे पूरी तरह इंसान थे, मगर अल्लाह ने उन्हें रसालत के लिए ख़ास तौर पर चुना और विशेष तैयारी दी; वे इंसानी इतिहास में एक बेमिसाल नमूना बने और अल्लाह ने आदम की औलाद में उनसे जैसा कोई और नहीं बनया ﷺ-656,.

يحتاج الناس إلى الرسل لأنهم بشرٌ من جنس من أُرسلوا إليهم، يولدون ويموتون ويأكلون ويمشون في الأسواق. وقد عجبت الأمم قديماً من إرسال بشر، لكن الله بين أن الرسول يجب أن يكون من جنس قومه ليتأسوا به. فليس في الرسل شيء من الألوهية، بل هم عباد مكرمون اصطفاهم الله بالوحي.

عصمة الرسل ثابتة فيما يتعلق بتبليغ الشريعة؛ فإذا بلغوا عن الله فهم لا ينطقون عن الهوى. أما في الأمور الدنيوية والاجتهادات الشخصية التي لم ينزل فيها وحي، فقد يقع الخطأ، ولكن الله لا يقرهم عليه بل يبين لهم الصواب، كما حدث في قصة الأعمى وقصة أسرى بدر، تأكيداً لأن وحي السماء هو الميزان القويم.

محمد ﷺ هو خاتم الأنبياء، ورسالته عامة للناس كافة وصالحة لكل زمان ومكان. لقد جاءت الشريعة بمرونة عظيمة، حيث وضعت نصوصاً قطعية للعقائد والعبادات لا تقبل التغيير، بينما تركت مساحة واسعة في المعاملات الإدارية والسياسية ليجتهد فيها المسلمون بما يحقق المصلحة العامة، شريطة الالتزام بقواعد الإسلام العامة.

تتسم شخصية محمد ﷺ بكونها معجزة في حد ذاتها؛ فصدقه وأمانته وتواضعه بين أصحابه وحياته الزاهدة كلها دلائل على عظمته. لقد كان بشراً كاملاً، لكن الله اختصه بالرسالة وأعده إعداداً خاصاً، فكان نموذجاً فريداً في تاريخ البشرية، ولم يخلق الله في طراز أبناء آدم مثله ﷺ.