उनका ज़ह्द और विनम्रता ﷺ

उनका सादा जीवन ﷺ

आइशा رضي الله عنها ने कहा: 'आल-ए मुहम्मद ﷺ दो लगातार दिनों तक जौ की रोटी से पेट नहीं भर पाते थे जब तक رسول الله ﷺ का देहांत नहीं हुआ।' — رواه البخاري ومسلم [al-Bukhari wa Muslim]. और अनस رضي الله عنه ने कहा: 'رسول الله ﷺ ने किसी बड़ी थाली पर नहीं खाया और न ही छनी हुई सफेद रोटी खाई जब तक वे न मरे।' — رواه البخاري [al-Bukhari].

  • رسول الله ﷺ ने सफेद छनी हुई रोटी नहीं देखी जब तक वे अल्लाह से नहीं मिले — رواه البخاري عن سهل بن سعد رضي الله عنه [al-Bukhari 'an Sahl bin Sa'd رضي الله عنه].
  • आइशा رضي الله عنها ने कहा: 'वा-ल्‍लाहि, वे एक ही दिन में दो बार रोटी और मांस से तृप्त नहीं होते थे।' — رواه الترمذي [al-Tirmidhi].
  • वे ﷺ अपने कपड़े अपने हाथ से सिलते थे, अपने जूते स्वयं चिपकाते थे और गधा में सवार होते थे — رواه أحمد [Ahmad].
  • उनका बिछौना ﷺ अَدَم (चमड़ा) का था और उसके अंदर खज़ूर के तारों/रेशों से भरा था — رواه الترمذي في الشمائل [al-Tirmidhi fi al-Shama'il].
  • उन्होंने وارिसों के लिए कोई दौलत नहीं छोड़ी सिवाय अपनी खच्चर, अपने हथियार और एक ज़मीन जिसे उन्होंने सदका बना दिया ﷺ
  • वे घर में अपने घरवालों की सेवा करते, भेड़ का दूध निकालते और घर के कामों में मदद करते थे ﷺ

लोगों के प्रति उनकी नम्रता ﷺ

उन्होंने ﷺ अपने उच्च दर्जे के बावजूद सबसे ज़्यादा नम्रता दिखाई; वे गरीबों और मामूली लोगों के साथ बैठते और उनका हाल-चाल करते, दास की दावत का जवाब देते, और जरूरत में विधवाओं व अनाथों के साथ चलते थे। जब वे किसी सभा में बैठते तो अपने और साथियों के बीच कोई फर्क न करते; एक अजनबी उन्हें तब तक पहचान न पाता जब तक वह पूछता न हो।

  • वे आज़ाद और दास तथा मملूक—सबकी दावत स्वीकार करते थे ﷺ
  • वे बीमार का हाल-चाल लेने जाते, शवयात्रा में शामिल होते और दावतों का जवाब देते थे ﷺ
  • वे विधवाओं और अनाथों की ज़रूरतों में उनके साथ चलते थे ﷺ
  • वे सभा में अपने आप को अपने साथियों से ऊपर नहीं उठाते थे ﷺ
  • वे छोटे को बड़े से पहले सलाम करते थे ﷺ
  • वे मिलने वाले से हाथ मिलाते और तब तक हाथ नहीं छोड़ते जब तक सामने वाला खुद हाथ नहीं हटाता ﷺ

उनकी उदारता ﷺ

वे ﷺ लोगों में सबसे ज़्यादा उदार थे, और रमज़ान में जब जबराईल उनसे मिलते थे वे सबसे अधिक उदार होते थे; उनकी उदारता ﷺ तेज़ हवा की तरह तीव्र थी — متفق عليه [Muttafaqun 'alayh]. और उन्हें कभी किसी ने कुछ माँगा तो उन्होंने न कहा; और जब उन्हें धन दिया जाता तो वे वह सारा पहले ही बँटवा देते थे।

  • सबसे उदार इंसान — और रमज़ान में सर्वाधिक उदार
  • उसकी उदारता तेज़ बहती हवा से भी अधिक थी — [Muttafaqun 'alayhi] इब्न अब्बास से رضي الله عنهما
  • जिससे भी माँगा गया कभी उसने 'ना' नहीं कहा — अगर उसके पास था तो दे देता और अगर नहीं था तो वादा कर देता
  • वह सारा धन शाम होने से पहले बाँट देता था