उनकी आवाज ﷺ और उनकी भाषा
उनकी आवाज ﷺ की खूबसूरती
रसूलुल्लाह ﷺ की आवाज़ सबसे खूबसूरत और सबसे मधुर आवाज़ों में से थी। البراء بن عازب رضي الله عنه ने कहा: «لو تسمع قراءة رسول الله ﷺ بالليل؛ ما هو إلا أن يأخذ بقلبك». और أبو موسى الأشعري رضي الله عنه ने कहा: «لو رأيتَني وأنا أستمع لقراءته ﷺ تلك الليلة، وقد أصغيتُ له، تحسبني قد أُعطيتُ مزماراً من مزامير آل داود» — [Al-Bukhari] और [Muslim].
- उनकी तिलावत ﷺ का स्वर दाउद की मिज़मार के समान था — यह अबू मूसा الأشعري ने दोनों सहीहों (في الصحيحين) में कहा।
- जब वह पढ़ते तो वह दिलों को अपनी ओर खींच लेते थे — यह البراء بن عازب رضي الله عنه ने कहा।
- उनकी आवाज़ जोरदार और ऊँची थी — जब वह उसे उठाते तो वह फिज़ा भर देती थी।
- वे तरतील के साथ पढ़ते थे और हर हर्फ़ को स्पष्ट सुनाया जाता था — [Abu Dawud] ने रिवायत की।
उनकी बयानबाज़ी और فصاحة ﷺ
عائشة رضي الله عنها ने कहा: «ما كان رسول الله ﷺ يسرد كسردكم هذا، ولكنه كان يتكلم بكلام بيِّن فصل، يحفظه من جلس إليه» — [Al-Bukhari] और [Muslim] ने रिवायत की। और أنس رضي الله عنه ने कहा: «كان رسول الله ﷺ يعيد الكلمة ثلاثاً لتُعقل عنه» — [Al-Bukhari]। और रसूल ﷺ ने कहा: «أُوتيتُ جوامع الكلم» यानी कम शब्दों में व्यापक معنियों को समेटने वाली बातें — [Muttafaqun 'alayhi].
- جوامع الكلم: उनकी बातें ﷺ कम शब्दों में पर अर्थों में व्यापक थीं — [Muttafaqun 'alayhi]
- उनकी वाणी स्पष्ट और क्रमिक थी, जिसे हर बैठने वाला याद रख लेता — [Muttafaqun 'alayhi] (عائشة رضي الله عنها से)।
- वह किसी शब्द को तीन बार दोहराते थे ताकि वह समझ में आ जाए — [Al-Bukhari] ने أنس से रिवायत की।
- वे ترتيل और ترسّل के साथ बोलते थे — [Abu Dawud] ने रिवायत की।
- वह हर लोगों को उनकी भाषा में مخاطب करते और उनके मकसदों को समझते थे।
उनकी भाषा और उनकी शिक्षा ﷺ
रसूल ﷺ भाषाई रूप से अरबों में सबसे فصیح थे; उन्होंने कहा: «أنا أفصح العرب بيد أني من قريش ونشأتُ في بني سعد بن بكر». उन्हें अरबी और गैर-अरबी बोलियाँ आती थीं और वे हर क़बीले की بلاغة के बराबर हाज़िर होते थे; बनी سعد में पल्लवित होकर उन्होंने अरबों की सबसे निपुण बोली हासिल की। और वह लोगों को नर्मी और सरलता से सिखाते थे, और कभी भी किसी को कठोरता से डांटते नहीं थे।
- अरबों में सबसे فصیح — बनी سعد में परवरिश, सबसे बेहतरीन क़बीला
- क़ुरैश से — और क़ुरैश ही अरबों में सबसे فصیح थे
- उन्होंने अरबों की बोलियाँ समझीं और हर क़ौम को उनकी अनुकूल भाषा में संबोधित किया करते थे
- वह नरमी और सरलता से पढ़ाते थे — और कभी भी किसी को कड़ी फटकार नहीं दी।